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तुम्हारे लिए सियासत क्या है मुझे इल्म नहीं ,लेकिन मेरे लिए मेरी सियासत मेरा दीन है :-अनवर दुर्रानी महासचिव राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल उत्तर प्रदेश

बातिल की मुखालफत करना हमारा फ़र्ज़ है ! लेकिन बातिल की ग़लत कारकर्दगी का महज़  तज़करा भर कर लेना या उसका फेसबुक पर मज़ाक़ उड़ाना या मज़म्मत कर देना क्या हमारे फ़र्ज़ की अदाएगी को मुकम्मल कर देता है ; जी नहीं हरगिज़ नहीं हमारा फ़र्ज़ है बातिल को उखाड़ फेंकना और बातिल से अपनी अवाम की हिफाज़त करना ! क़ौम का एक बड़ा तब्क़ा जो फेसबुक से जुड़ा हुआ है और क़ौम से हमदर्दी का दावा भी करता है  उसका मुशाहिदा करने पर इल्म होता है की उनका जूनून और क़ौम परस्ती फेसबुक तक ही महदूद है सारा जूनून जोश और वलवला ऑनलाइन ही है !
दुश्मन अपनी हर चाल को अमली जामा पहना रहा है और हम फेसबुक पर लाइक समेटने पर इक्तेफ़ा कर रहे हैं ! ये क़ौम के साथ नाइंसाफी और धोका है अगर आप हकीकत मैं अपनी क़ौम की फ़लाह के लिए संजीदा हैं तो ख्याल करिये की हमारी कारगुज़ारियां अमली हों ख्याली नहीं , जिस तरह हम अपने ज़ाती अम्ल वो चाहे तालीमी हों या माशी, दीनी हों या दुनियावी को वक़्त देते है , और मेहनत करते हैं हमें चाहिए की अपनी क़ौम के लिए भी कुछ वक़्त मुक़र्रर करें , एक घंटा ही सही लेकिन वक़्त मुक़र्रर करें और तंज़ीम के लिए लोगों से मुलाक़ात करें , इत्तेहाद की अपील करें , अपनी तंज़ीम की क़ुर्बानियां याद दिलाएं और वक़्त के ऐतबार से तंज़ीम की अहमियत बताएं ! घर बैठकर इंक़लाब का इंतज़ार करने वाले खुद को धोका ही दे रहे है !
इंक़लाब चाहिए तो निकलो बाहर टोलियां बनाओ और निकलो गली गली , समझाओ लोगों को , जोड़ो हाथ, डालो ठहोरियों मैं हाथ !
कयूंकि
* अगर मस्जिद की तामीर दीन है तो मस्जिदों की हिफाज़त भी दीन है !
* अगर नमाज़ दीन है तो नमाज़ और नमाज़ियों की हिफाज़त भी दीन है !
* अगर शरीयत पर अम्ल दीन है तो शरीयत पर उठने वाली उँगलियों को तोडना भी दीन है !
* अगर हलाल रिज़्क़ कमाना दीन है तो ज़राए की हिफाज़त भी दीन है !
* अगर तालीम दीन है तो तालीमी इदारों और मदरसों की तामीर और हिफाज़त भी दीन है !
* अगर इत्तेहाद दीन है तो तो क़ौम के नौजवानो बुज़ुर्गों और बहिन बेटियों की हिफाज़त भी दीन है !

तुम्हारे लिए सियासत क्या है मुझे इल्म नहीं ,लेकिन मेरे लिए मेरी सियासत मेरा दीन है !

                                      अनवर दुर्रानी
                                         महासचिव
                                 राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल
                                        ( उत्तर प्रदेश )

तुम्हारे लिए सियासत क्या है मुझे इल्म नहीं ,लेकिन मेरे लिए मेरी सियासत मेरा दीन है :-अनवर दुर्रानी महासचिव राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल उत्तर प्रदेश Reviewed by Unknown on August 24, 2018 Rating: 5

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