मैं आजमगढ़वासी हूँ!! मैं हिन्दू हूँ या मुसलमान कुछ लोग मुझे आतंकगढ़वासी कहते हैं,-अशरफ आज़मी
मैं आजमगढ़वासी हूँ!! मैं हिन्दू हूँ या मुसलमान कुछ लोग मुझे आतंकगढ़वासी कहते हैं,
जबसे 2008 का बटला हाउस एनकाउंटर हुआ, मेरे शहर, मेरे ज़िले को बदनाम कर दिया, विद्वानो व साहित्यकारों के इस शहर को आतंक की नर्सरी का नाम दे दिया पर किसी ने सच नहीं जाना और न जानना चाहा, मैं आज़मी हूँ और खुद्दार हूँ इसलिए मैं इस ज़ुल्म के खिलाफ खड़ा हुआ, मैं चिल्लाया, मैंने बताया, मैंने समझाया, मैंने हुकूमत से अपने हक़ की गुहार लगायी, मैंने अदालत से इन्साफ की गुहार लगायी लेकिन मुझे इन्साफ नहीं मिला पर मेरी जंग जारी है इन्साफ के लिए, इस कलंक को मिटाने के लिए, अपने शहर पर लगे आतंक के इस दागे को खत्म करने के लिए, मैं पिछले 10 साल से इस ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठा रहा हूँ और इस लड़ाई को तब तक लड़ता रहूँगा जब मुझे इन्साफ नहीं मिल जाता क्योंकि ये लड़ाई मेरे वजूद की लड़ाई है, ये लड़ाई मेरे अस्तितिव की लड़ाई है और मुझे यक़ीन है की मेरी जीत होगी क्योंकि मैं सच्चा हूँ !! मैं आज़मी हूँ और हक़ पे लाज़मी हूँ !!
खामोशी कही बुजदिल ना कर डाले तुम्हे, जब जरूरत हो तो जुबाँ खोला करो।
जी - हुज़ूरी और गुलामी छोड़ कर यारो, क़ौम के हक़ में भी कुछ बोला करो।
अशरफ आज़मी
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April 07, 2018
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